भाग्य को अपनी मुट्ठी में कैसे करे जानिए 

भाग्य को अपनी मुट्ठी में कैसे करे जानिए

 

मैं ने कई बार कई लोगों को अपने भाग्य को दोष देते सुना है। इससे अधिक दुःख की बात क्या होगी कि एक सेहतमंद, हट्टा-कट्ठा और बुद्धिमान नौजवान, जिसके सामने उसका संपूर्ण जीवन अवसरों से भरा पड़ा है, यह कहता मिले कि- “उसके भाग्य में ही दर-दर की ठोकरें खाना और अभाव में जीवन गुजारना लिखा है”। मतलब उसकी नजर में परिश्रम और प्रयास करना ही व्यर्थ है! परन्तु मुझे लगता है कि ऐसे लोगों की दुर्दशा का कारण उनकी यह सोच ही है। वे तो अपने भाग्य का रोना रो कर एक ही स्थान पर बैठे रह गये और दुनिया कहां निकल गई। उनका मानना ही होता है कि हालात सदा मेरे विरूद्ध रहे, मुझे कभी अवसर ही नहीं मिला कुछ करने के लिए। भला ऐसा कभी हो सकता है कि इतने विशाल विश्व में संभावनाओं की ही कमी हो! यह सबकुछ उनके बहाने है, जो अपनी सफाई के लिए दिए जाते हैं।

 

अब्राहम लिंकन की जीवनी हमारे जीवन-उत्कर्ष के लिए प्रेरणास्वरूप है। अभावों में जन्में और पले अब्राहम ने बचपन में एक सपना संजोया था – अमेरीका का राष्ट्रपति बनने का। जरा सोचिए की अगर वे प्रारम्भ में आई कठिनाइयों और असफलताओं को अपना भाग्य मान लेते और आगे कभी कांग्रेस, सीनेट, और उप-राष्ट्रपति का चुनाव ही न लड़ते! तो क्या वह कभी 52 साल की आयु में अमेरीका के राष्ट्रपति बन पाते। मुझे ऐसा लगता है कि अवसर और धन हमारे पास हमेंशा न सही पर लाइफ में एक बार आना प्रकृति का नियम है। हो सकता है किशोरवस्था में न आकर युवावस्था में आये पर आएगा जरूर। अब यदि कोई हाथ में आये अवसर को पहचान न सके या उसका उपयोग करके धनी बनने को तैयार न हो तो इसका दोषी वह स्वयं है। काम जो भी किसी को मलिता है वह छोटा या बड़ा नहीं होता। आरम्भ में तो कोई भी प्रयास सौ प्रतिसत सफल नहीं होता।

 

हजारों लड़के-लड़कियां केवल भाग्य के ही भरोसे अवसर पाने की प्रतीक्षा में बैठे रहते हैं। वे यह नहीं जानते कि अपने जिस समय की प्रतीक्षा में वे जिस अमूल्य समय को खोते जा रहे हैं वह लौटकर कभी नहीं आ सकता। अपने भाग्य के भरोसे ही वह अपने जीवन को नष्ट करते जा रहे हैं। अवसर कभी घर पर दस्तक नहीं देता, उसे तो खोजना पड़ता है। वास्तव में अवसर आपके अंदर छीपा है उसे पहचानने का प्रयास करें। भाग्य आपकी मुट्ठी में है।

 

जिस समय नवयुवक फैराडे प्रयोगशाला में काम करता था और विज्ञान सम्बन्धित परीक्षणों को किया करता था। तब उसने अपने मन में कहा था काश! मेरे पास एक बहुत बड़ी परीक्षण प्रयोगशाला होती। फैराडे उनमें से न था वह केवल सोचता और अपने भाग्य को कोसने लगता। उसने अद्तिीय खोजें तथा परीक्षण किये और उन्नति के पथ पर इस प्रकार अग्रसर हुआ कि सर हफेडेवी चकित रह गये। एक बार प्रसिद्ध वैज्ञानिक हफेडेवी ने उसके उस्ताद से पूछा कि आपकी सबसे उत्तम वैज्ञानिक खोज क्या है?

 

‘माइकल फैराडे’ – यही उनका उत्तर था।

 

एक और भी माइकल था माइकल एंजली। उसने एक अवसर खोज लिया और संगमरमर के टुकड़ों से डेविड की आश्चर्यजनक मूर्ति का निर्माण किया। अन्य कलाकारों के द्वारा संगमरमर के टुकड़े रद्दी में फेंक दिये गये थे उन्हें ही उठा कर माइकल एक अनमोल कलाकृति की रचना करने में सफल हुआ।

 

बढ़िया अवसर, प्रभावशाली मित्र, बड़ी पूंजी, उंचा कुल, किसी सिफारिश इन बातों से कोई व्यक्ति महान् नहीं बनता।

 

बड़ा नामवर इन्सान वही बनता है जिसके अन्दर बड़ा बनने की भावना छिपी रहती है। आप जिस अच्छे अवसर की तलाश में हैं वह आपके अन्दर छिपा है। इसे न तो किस्मत का खेल कहते हैं न ही किसी की सिफारिश या सहायता।

 

इसे कहते हैं कर्मठता।

 

आज के युवक किसी कार्य को करते समय सफलता की आशा तुरन्त कर लेते हैं, किन्तु वह अपने को बदलने और सुधारने के स्थान पर किसी भी बाधा को कोसते हुए पीछे हट जाते हैं।

 

जब आप यह निश्चय कर लेंगे कि कठिनाइयों का मुकाबला करना है। बाधाओं से जूझना है. तब आपको सफलता पाने में अधिक विलम्ब नहीं लगेगा। बस यही तो एक सफल और भाग्यशाली व्यक्ति का रहस्य है और रूजवेल्ट ने भी कहा है कि – ‘जो व्यक्तिी कार्य करते समय भूलें करता हैं वह अच्छा नहीं करता, किन्तु जो अपने भाग्य के भरोसे बैठा रहे और यदि भाग्य में होगा तो प्राप्त होगा अथवा कहीं शुरूआत करने पर नुकसान हो जाये ऐसा सोचने वाला व्यक्ति तुच्छ ही रह जाता है। इससे अच्छा है कि आप काम में जुट जायें।‘

 

 

 

स्वयं को माफ़ करने के ५ तरीके।

 

कभी कभी हम कुछ ऐसा कर बैठते है या बोल देते हैं जिसके लिए हमें बाद में बेहद पश्चाताप होता है। अगर आपके साथ भी हाल में ही कुछ ऐसा हुआ है तो आपको ये सब भूलने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही होगी, खासकर तब जब आपने किसी अपने का दिल दुखाया हो।

 

कुछ महीने पहले की बात है, मेरी एक मित्र से अनबन हो गयी। हर गलतफहमियों की तरह ये भी तेजी से और अचानक हुआ।

 

बात ये थी की मेरा दोस्त मुझे एक नेटवर्किंग बिज़नेस में ज्वाइन करने के लिए मना रहा था, जिसके लिए मैंने उसे नम्रतापूर्वक कई बार मना करने का प्रयास किया था। ये सिलसिला कयी दिनों तक चलता रहा लेकिन फिर भी मैं ये सहता रहा, और फिर मेरा दोस्त मेरे दोस्त जैसा कम और सेल्समेन जैसा ज्यादा व्यवहार करने लगा।

 

और फिर इसी बीच उसने कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी जिसे मैं अपना अपमान समझ बैठा और मेरे धैर्य का बांध टूट गया। मैं तुरंत गुस्से में उसे खरी खोटी सुनाकर उस जगह से हट गया। उस समय तो मुझे लगा की मैंने सही किया लेकिन बाद में मुझे अहसास हुआ कि मैं उसके कहने के मतलब को गलत समझ बैठा और जल्दबाजी में निर्णय ले बैठा।

 

हालाँकि बाद में अपनी गलती के लिए मैंने उससे माफ़ी मांग ली लेकिन फिर भी मुझे ये अहसास था की ये एक बड़ी गलती थी और इससे हमारी दोस्ती टूट भी सकती थी और रहीम कवि का ये दोहा बार बार स्मरण में आ जाता था

 

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय,

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय।

 

इस घटना से मैंने ये सीखा की अपने आप को और अपनी गलतियों को माफ़ करने में कुछ बातें बेहद सहायक होती हैं, इन्ही बातों को आपसे साझा कर रहा हूँ :

 

1. दूसरों को दोष देना बंद करें :

2. अपने आप को माफ़ करने से पहले ये जान लेना जरुरी है कि आखिर आपने किया क्या था। आपके साथ हुयी घटना को विस्तार से लिख लें और अपने उन बातों को भी लिखें जिससे उस घटना के घटने में मदद मिली हो। किसी और व्यक्ति या परिस्थितियों को दोष देने से बचें और सिर्फ अपने आप पर ध्यान केंद्रित करें। हो सकता है ऐसे करते समय आप असहज महसूस करें।

मेरी परिस्थिति में मैं सिर्फ अपने दोस्त के आक्रामक व्यवहार को ही देख पाया और अपनी प्रतिक्रिया को सही ठहराया, लेकिन सारी घटना को विस्तार से लिखने और एनालाइज करके सिर्फ अपने कर्मो पर ध्यान देकर मुझे महसूस हुआ की मैंने उसकी बातों का गलत अर्थ निकल कर निर्णय लिया।

 

2. माफ़ी मांगने में संकोच न करें :

3. कुछ इस तरह हमने अपनी जिंदगी आसान कर ली ,

4. कुछ को माफ़ कर दिया और कुछ से माफ़ी मांग ली।

हालाँकि माफ़ी मांगना इतना आसान नहीं होता लेकिन अगर आप किसी से माफ़ी मांगने के लिए पहल करते हैं तो ये दर्शाता है कि आपसे गलती हुयी थी और आप उसके लिए शर्मिन्दा हैं, और इस तरह आप वैसी गलतियों को दोहराने से बच जाते हैं।

 

3. नाकारात्मक विचारों को उत्पन्न होते ही त्याग दें:

कभी कभी माफ़ किये जाने पर भी हम अपने आप को माफ़ नहीं कर पाते। हालाँकि मेरी मेरे मित्र से सुलह हो गयी थी लेकिन फिर में मुझे अपने अपनी गलतियों पर समय समय पर पछतावा होता रहता था, बाद में धीरे धीरे मुझे ये समझ में आ गया की स्वयं को माफ़ करना एक बार में ही संभव नहीं है, यह धीरे-धीरे समय के साथ परिपक्व होता है। इसलिए जब भी आपके मन में नाकारात्मक विचार आये गहरी सांस लेकर उसे उसी समय निकल दें और अपना ध्यान कहीं और लगायें, या इस तरह की कोई प्रक्रिया जिसे आप पसंद करते हों अपनाएँ।

 

 

4. शर्म के मरे छुपने की वजाय सामने आईये :

अपनी किसी भयंकर गलती के बाद शर्म से छुप जाना बिलकुल भी अच्छा नहीं है। अपनी गलती के बाद मैं अपने दोस्त से नजरें मिलाने में झिझक रहा था क्यूंकि मुझे डर था की कहीं वह मुझे पिछली बात को याद न करा दे, लेकिन जैसे ही मैं उससे मिलने की हिम्मत जुटा पाया मैंने महसूस किया कि मेरा डर गलत था।

5. अपनी गलतियों के लिए आभारी बने :

अपनी गलतियों के प्रति आभारी होना आपको बिलकुल विचित्र लगेगा खासकर वैसी गलतियां जिनसे आपको शर्मिंदगी महसूस हुयी हो या दुःख पहुंचा हो लेकिन अगर आप गौर से एनालाइज करेंगे तो पाएंगे कि ऐसी की गयी गलतियों ने आपको कितना मजबूत और सुदृढ़ किया है। आप ये देख पाएंगे कि इन्ही गलतियों की वजह से ही आप अधिक बुद्धिमान, मजबूत और विचारशील हो पाये हैं।

इन्ही गळतोयों की वजह से ही मैं किसी भी बात पर जल्द निर्णय लेने से बचता हूँ और जब भी मैं परेशान होता हूँ तो मैं समय लेकर सोच विचार करके ही आगे की बातों को तय करता हूँ।

 

आपने स्वयं को माफ़ करने में किन बातों से मदद पायी है हमें जरूर बताएं, आपकी बातें अगर किसी और की मुश्किलें आसान करने में सहायक होंगी तो हम उन्हें इस पोस्ट में ऐड कर देंगे ताकि ढेर सारे लोग उन्हें पढ़ सकें।

 

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